शायरी

बात दिल की दिल मे रह गयी


मंज़िल मेरी नज़रो मे ही रह गयी


जब वक़्त आया 'मुंतज़िर' ज़िंदगी से रुखसत होने का


वो अधूरी ख्वाइश , अधूरी ही रह गयी

facebook-new.png
facebook-messenger.png
twitter.png
whatsapp.png

तेरे इश्क़ की चिंगारी मे खुद को जला दिया


तेरे इंतेजर मे सब कुछ भुला दिया


यूँ तो हज़ारो हसरते थी ज़िंदगी मे


एक तुझे पाने की राह मे, मैं सबको मारता चला गया

facebook-new.png
facebook-messenger.png
twitter.png
whatsapp.png

तू नदी चंचल सी, मैं तेरा साहिल जैसे


तुम कोई चाँद पूनम का, मैं बस तुझे तकता चकोर जैसे


आ हो जाए कुछ यूँ एक-दूजे के


तू मेरी मीरा , मैं तेरा कृष्णा जैसे

facebook-new.png
facebook-messenger.png
twitter.png
whatsapp.png

वो कुछ यूँ मेरी रुखसत पर रोया होगा


सारा समंदर उसकी आँखो मे समाया होगा


सर्फ कर मेरी यादो के जखीरे को


वो खुदा से मुझे माँगने जहन्नुम भी गया होगा

facebook-new.png
facebook-messenger.png
twitter.png
whatsapp.png

वीराने को जो कर दे गुलशन, वो कली हो तुम


हर महफ़िल को कर दे जो रंगीन , वो रस हो तुम


ना उर्वशी , ना मेनका , ना चाँद है तुम सा


हर ज़रा जिसे पाना चाहे , खुदा की वो नायाब मूर्त हो तुम

facebook-new.png
facebook-messenger.png
twitter.png
whatsapp.png

इन आँखो का अधूरा सपना रही तुम


इन धड़कनो की अधूरी आरजू रही तुम


शमा -परवाना सा रिश्ता है, हमारा - तुम्हारा


ज़िंदगी जलती रही , पर मंजिल रही तुम

facebook-new.png
facebook-messenger.png
twitter.png
whatsapp.png

Shayar |Blogger|Writer