क्या तुम कोई हक़ीक़त हो या कोई सुनहरी कल्पना

मुंतज़िर मारवाड़ी

Saturday, 23 May, 2020

Share Now
facebook-new.png
facebook-messenger.png
twitter.png
whatsapp.png

क्या तुम कोई हक़ीक़त हो या कोई सुनहरी कल्पना


ये गुलाब की महक है या तुम करीब से गुज़रीहो


ये बस एहसास है या तुम सच मे मुझ मे सामायी हो


ये मेरे बदन की गर्माहट है या सच मे तुम मेरे करीब हो


ये मेरी दीवानगी है या तुम सच मे कुछ कह रही हो


क्या तुम सच मे मेरी हो या होने का बस एक खूबसूरत धोखा