आज थम से बारिश हुई

मुंतज़िर मारवाड़ी

आज थम से बारिश हुई


आज उनकी याद फिर आयी



ऐसा लगा रो रहा है खुदा भी


खुदा को भी मेरी हालत पर दया आयी


जब देखा दो पन्छियो के जोड़े को


मुझे अपने बीते लम्हातो की याद आयी


याद आया वो पल जब हम साथ थे


वो हम, वो जगह फिर याद आयी



आज थम से बारिश हुई


आज उनकी याद फिर आयी



जब आया मोसम सावन का, जो गिरी दो बूंदे चेहरे पर


भीगी ज़ुल्फो मे छुपा वो मासूम सा चेहरा, फिर याद आया


वो मोसम , उनकी नादानिया फिर याद आयी



आज थम से बारिश हुई


आज उनकी याद फिर आयी



फिर वक़्त आया शाम ए अलम का


तेरे रुखसत का वो वक़्त भी याद आया


जब हम दोनो की ना बात हुई


थे चेहरे उदास हमारे


पर फिर भी होंठो पे ना वो बात आयी


आज उस चुप्पी की सज़ा बहुत याद आयी



आज थम से बारिश हुई


आज उनकी याद फिर आयी

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